प्रेम भारद्वाज- जिनकी सबसे स्थायी पहचान है, " पाखी" के पूर्व सम्पादक के रूप में। अपने सम्पादकीय दौर के दौरान उन्होंने कहानी विधा में अलहदा भाषा, भाव,शैली के साथ हस्तक्षेप किया। कुछ कहानियां पाठकों के आगे चमककर उनके कहानीकार का असर छोड़ गयीं, पर सबसे मजबूत उपस्थिति प्रेम जी ने अपने सम्पादकीय हस्तक्षेप के बहाने कायम की। स्वातंत्र्योत्तर साहित्यिक पत्रकारिता में राजे....
