देवेश पथ सारिया

मैं तुम्हारे देश की गिलहरियों के रंग का हूं

हिंदी के मेरे पाठक
मुझे पुकारते हैं-
'ताइवान में रह‌ रहा कवि'
और यहां ताइवान में
किसी को नहीं पड़ी
मेरी कविताओं की

तुम थीं तो सुना करती थीं 
मेरी नयी-पुरानी कविताएं
छोटी, काली, प्यारी
आँखों को टिमटिमाते हुए

नीले रंग के प्रति तुम्हारे प्रेम पर लिखी
मेरी कविता पढ़कर
तुमसे डाह रखती हैं
नीले से प्रेम ....

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