हिंदी के मेरे पाठक
मुझे पुकारते हैं-
'ताइवान में रह रहा कवि'
और यहां ताइवान में
किसी को नहीं पड़ी
मेरी कविताओं की
तुम थीं तो सुना करती थीं
मेरी नयी-पुरानी कविताएं
छोटी, काली, प्यारी
आँखों को टिमटिमाते हुए
नीले रंग के प्रति तुम्हारे प्रेम पर लिखी
मेरी कविता पढ़कर
तुमसे डाह रखती हैं
नीले से प्रेम ....
