स्त्रियां जन्मजात बागी होती हैं
अपनी मां से वह इसे विरासत में पा लेती हैं
चुपचाप
पिता , भाई , प्रेमी , पति और पुत्र
निरंतर उस के बागी होने को
खाद देते ही रहते हैं
यह समूचा पुरुष समाज देता रहता है खाद
स्त्री की बगावत का पौधा बढ़ता रहता है
यह पौधा कब वृक्ष बन जाता है
और यह वृक्ष बढ़ते-बढ़ते कब वन बन जाता है
स्त्री जान नहीं पाती
