सुनो मछुआरे
जितने जुगनू
तुम्हारी आँखों में
चमक रहे हैं न
टिम-टिम
तारों के जैसे
वें क्या
हमेशा चमकते रहते हैं
इसी तरह
सुनो मछुआरे
जब तुम
जाल फेंकते हो
सागर में
तुम्हारी बाहों की मछलियां
मचल-मचल जाती हैं
सुनो मछुआरे
इतनी शिद्दत
कहाँ से लाते हो तुम?
जबकि
तुम्हारे घर के चूल्हे की आँच
जलती है धीरे-धीरे
और ढिबर....
