शोभनाथ शुक्ल

आया ऊँट पहाड़ के नीचे

मास्टराइन भौउजी की दबंगई देखिये हफ्ते में एकाध दिन की बात कौन कहे, महीने में एकाध घंटे के लिए भी स्कूल आना नहीं चाहती। जो भी हेड मास्टर आता है वे स्थानीय होने के नाते उस पर किसी न किसी तरह दबाव बनवा ले जातीं और अगर कोई हेडमास्टर कुछ दाँये-बायें करता तो वे पब्लिक की तरफ से इतना शिकायती प्रार्थना पत्र डलवा देंती कि वह बेचारा हेड मास्टर अन्ततः पस्त हो जाता और वे शेरनी की तरह अ....

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