इन्सानों का एक-दूसरे से मिलना भी मुकद्दर का वह अनलिखा हिस्सा है जो मिलने के बाद अध्याय बनता है । उसे बाद में जीने और पढ़ने का मौका मिलता है । पहले दिन जब मैं कुछ देर के लिए स्टाफ-रूम में बैठा तो परिचय कराते हुए किसी ने कहा – इनसे मिलें , मिस्टर शील , हिन्दी डिपार्टमेण्ट में आपके सीनियर ।
मिस्टर शील गौर वर्ण , दोहरे बदन के स्वस्थ और दर्शनीय युवा थे । चेहरे पर तराशी हुई खूबस....
