यह चाहे एक विडंबना ही हो, लेकिन इस सच्चाई से इनकार नहीं किया जा सकता है कि जब सत्ता किसी मजबूत विचारधारा से संचालित होती है तो लोकतंत्र कमजोर हो जाता है। विचारधारा के साथ हमेशा एक तानाशाही आती है। यदि, विचारधारा जनपक्षधर हो, तो लोकतांत्रिक अधिकारों पर काफी हद तक प्रतिबंध के बावजूद, उससे संचालित सरकारें लोकहित में काम करती हैं, कुछ-कुछ एक उदार और प्रजा पालक राजा की तरह ही स....
