ऊंची तान में कैरल गाती युवा जमात का कोरस दम-ब-दम करीब आ रहा था। हवाओं में तिरते यीशु नासरी की सिताइश के गीतों में सर-बसर भीगी कोहिमा की यह शाम साल की सबसे मदहोशकुन शाम हुआ करती है। शुरू दिसंबर से ही हॉर्नबिल उत्सव के साथ इस सब्ज शहर के गोशे-गोशे में सुर और साजों की यह मिठास उतर आती है। लेकिन बड़े दिन की इस शाम की बात और है। एक तरह से यह शाम नए बरस की आमद तक कोहिमा को जलसों के समं....
