जिस शाम मैंने श्री वी के माथू के ऑफिस में जाकर पहली बार उन्हें आग्रह और अधिकार पूर्ण ढंग से अपने निवास पर चलने का प्रस्ताव दिया वह हम दोनों के लिए अप्रत्याशित था । न तो उन्होंने कल्पना की होगी और न मैंने इसे पहले से सोचा था । सब अचानक हुआ । बहरहाल, यह एक-दूसरे को जानने की दिशा में एक पहल थी जो हमारे दीर्घजीवी रिश्ते की बुनियाद बनी । मेरा अनुभव रहा है कि जिन रिश्तों में अपनापन ....
