जीब रिश्ता रहा नंदकिशोर नवल से। वे हमारे अध्यापक भी थे और वरिष्ठ सहकर्मी भी। उनसे वैचारिक-साहित्यिक हमारी लड़ाइयां भी खूब हुईं और हमने एक-दूसरे से बेपनाह मोहब्बत भी की। लगभग चार दशकों के संग-साथ में अनेक चढ़ाव-उतार आए। हम एक-दूसरे को कभी पसंद, कभी नापसंद करते रहे। एक-दूसरे की रुचियों को सराहते रहे और मजाक उड़ाते रहे। अब जब कि वे नहीं हैं तो लगता ....
