भोजन
बहुत हुत सारे बच्चों की तरह मुझे भी बचपन में गोश्त खाने को नहीं मिला
बहुत सारे बच्चों की तरह मुझे भी साग खाने की ट्रेनिंग दी गई
परिणामस्वरूप गोश्त खाने वाले बच्चों को मैं मांसाहारी कहकर चिढ़ाने लगी
और शाकाहारी कहकर सालों तक मैंने स्वयं का श्रेष्ठताबोध जगाए रखा
फिर वयस्क होकर जिस कढ़ाई में गोश्त पका हो, उस कढ़ाई में बने ....
