विजयश्री तनवीर अपने दूसरे कथा संग्रह से ही अब उभरते हुए नाम की जगह कहानी का एक स्थापित नाम हो गया है। चाहे दूसरा संग्रह चार वर्षों बाद आया पर इस संग्रह की कहानियां तनवीर की ‘लिखने की भूख’ का एक मुकम्मल उदाहरण है। संग्रह की हर कहानी के पीछे उनका परिश्रम बाकायदा दिखता है। वे किसी कहानी में कहीं पर भी कोई कसर छोड़ना नहीं चाहतीं। हर दृश्य, हर घटना, हर मोड़, शुरुआत और अंत को उन....
