अर्पण कुमार

सर्जनात्मकता ही सत्य है

साहित्य की प्रासंगिकता उन लेखकों के लिखे में कुछ विशेष चमक के साथ मौजूद होती है जो अपना स्वास्थ्य, अपनी आर्थिकी और पहचान की चिंता किए बगैर अहर्निश इसमें पूरी ईमानदारी के साथ दत्तचित्त हैं। कुछ ऐसे वरिष्ठ लेखक भी हैं, जो यादों की अपनी क्रमबद्धता को वापस पाने की जद्दोजहद में हैं और इस विषम दौर में भी साहित्यिक कार्यक्रमों में जाने की जिद किए रहते हैं। साहित्य की उपयुक्त....

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