नीलोत्पल रमेश

लीक से हटकर ग़ज़ल की नई राह

हिंदी ग़ज़ल का प्रारंभ दुष्यंत कुमार की ग़ज़लों से माना जाता है। पहले भी हिंदी में ग़ज़लें लिखी गईं, पर वे प्रारंभिक दौर की थीं, और उतनी प्रचलित भी नहीं हो सकीं। दरअसल पारंपरिक रूप से ग़ज़ल का जिक्र होने पर अमूमन उर्दू ग़ज़ल की तरफ ध्यान जाता है। पुराने जमाने में इसे राजाश्रय प्राप्त था। तब ग़ज़लकार अपनी ग़ज़लों के माध्यम से राजाओं का मनोरंजन किया करते थे। अधिकतर ग़ज़लें प्या....

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