जॉर्ज ऑर्वेल का उपन्यास ‘नाइंटीन एटी फोर’ साल 1949 में छपा था। ऑर्वेल ने कहा था कि उनके इस उपन्यास में जिन विकृतियों का जिक्र है, उनके लिए केंद्रीकृत अर्थव्यवस्था जिम्मेदार है। आज करीब 75 बरस बाद यह देखकर डर-सा लगता है कि जिसे ऑर्वेल ने किसी और समाज और समय के लिए लिखा था, वह हमारे समाज और समय में घटित होता जा रहा है। एक विडंबनामूलक कल्पना इस समय का यथार्थ बनती जा र....
