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अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ और खड़ी बोली की काव्य-प्रतिष्ठा

‘पाखी संवाद-जहां शब्द डरते नहीं’ यूट्यूब मंच से 15 अप्रैल, 2026 को प्रसारित संवाद।

दिवस का अवसान समीप था।
गगन था कुछ लोहित हो चला।
तरु-शिखा पर थी अब राजती।
कमलिनी-कुल-वल्लभ की प्रभा।।1।।
विपिन बीच विहंगम वृंद का।
कलनिनाद विवर्द्धित था हुआ।
ध्वनिमयी-विविधा विहगावली।
उड़ रही नभ-मंडल मध्य थी।।2।।
अधिक और ह....

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