शिव कुमार यादव

शिव कुमार यादव की कविताएं

मन की नदी

हे  मेरे मन की नदी
बह
कि तू ऐसे बह
कि आ मिले सारा जगत, 
हे मेरे मन की नदी
बह
कि तू बह बन ऐसी धारा 
कि मिट जाए क्लेश
सारे फकत, 

हे मेरे मन की नदी
बह
कि तू ऐसे बह
कि जैसे बहे
बसंती हवा
कि झड़ जाए
युद्ध की 
सारी आढ़त,

हे मेरे मन की नदी
बह
कि तू ऐसे बह
कि जैसे बहे
बर....

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