शैलेंद्र चौहान

शैलेंद्र चौहान की कविता

एपस्टीन की छाया

मुझे उतना ही मालूम है
जो अमेरिकी न्याय विभाग की
चुनिंदा फाइलों से छनकर
धीरे-धीरे बाहर आता है
और जिसे दुनिया भर का मीडिया
अपनी सुविधा के अनुसार
काट-छांट कर
खबरों की थाली में परोस देता है

बाकी जो कुछ है
वह अनुमान है
संकेत है
या उन लोगों की चुप्पी है
जो कभी
जेफरी एपस्टीन
से मिले थे
....

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