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हत्या एक स्वप्न की
एक सपना मिला था उसे,
जिसे उसने
अपनी इंद्रियों को साधकर,
कच्ची मिट्टी की तरह धीरे-धीरे गढ़ रही थी
संयम की चाक पर,
दिन-रात तपती रही,
पर हुक्मरानों ने
उसके सपनों की छत दरका दी
वैसे ही जैसे गहरे कुएं से
बड़ी मुश्किल से खींची गई
पानी से लबालब बाल्टी में
किसी ने चुपके से
एक छेद कर दिया हो,
प....
