पवन माथुर की पुस्तक ‘पाश्चात्य कथा-कहन चिंतन और हिंदी कहानी’ हिंदी आलोचना में एक नई तरह की उपस्थिति दर्ज कराती है। हिंदी में कथा-साहित्य पर अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं, लेकिन कथा कैसे काम करती है, उसकी संरचना किन तत्त्वों से बनती है, कथन-प्रक्रिया किस प्रकार अर्थ का निर्माण करती है और दृष्टिकोण, समय, कथावाचक तथा फोकलाइजेशन जैसे तत्त्व रचना को किस प्रकार प्रभ....
