शुभम मोंगा

प्रश्नों की आंच में सभ्यता

हर युग अपनी चमक के साथ अपने अंधकार भी रचता है, प्रमुख प्रश्न यह है कि उस अंधकार को देखने का साहस किसके पास है। शिव कुमार यादव की दूसरी आलोचनात्मक पुस्तक ‘सभ्यता समीक्षा और कविता’ की भूमिका इसी साहस की उद्घोषणा है। ‘सभ्यता समीक्षा में समय के इतिहास, संस्कृति, प्रकृति, सामाजिक संरचना, राजनीतिक व्यवस्था और आर्थिक प्रणाली का विश्लेषण आलोचनात्मक ढंग से प्रस्....

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