साहित्य की दुनिया में मतभेद कोई नई बात नहीं है। वैसे भी यदि साहित्य में असहमति न हो तो शायद उसका विकास भी रुक जाए। हर नई रचना अपने समय के स्थापित विचारों को चुनौती देती है और हर गंभीर आलोचना किसी स्थापित सत्य पर प्रश्नचिह्न लगाती है। इसलिए साहित्य में विवाद, बहस और प्रतिवाद स्वाभाविक हैं। अस्वाभाविक तब होता है जब बहस का स्थान भाषा की कटुता ले लेती है, जब तर्क क....
