शर्मा जी सारी जुगत लगा चुके थे मगर ताला था कि खुलने को तैयार ही नहीं।
सुबह-सुबह ही लखनऊ से साली की शादी निपटाकर लौटे थे। सोचा था कि फटाफट तैयार होकर दफ्रतर के लिए निकल लेंगे। लेकिन एक घंटे से ताले से जूझ रहे हैं। ताले से उन्हें इसलिए जूझना पड़ रहा है क्योंकि तमाम जेबें, बैग, सूटकेस आदि छान लेने के बावजूद चाभी नहीं मिली। हालांकि जाते वक्त चाभी उन्होंने ही रखी ....
