कैलाश केशरी

आखिरी चिट्ठी

बुढ़ापे की ढलान पर खड़े रामदीन काका आज असामान्य रूप से शांत थे। बरामदे की खाट पर बैठे वे सड़क की ओर एकटक देखते जाते, मानो कोई परिचित छाया अब भी लौट आएगी। गांव तो पहले जैसा ही था, पर उनका बेटा अब पहले जैसा नहीं रहा था। शहर ने उसे रोजगार भी दिया था और दूरी भी।
सावित्री काकी ने थाली रखते हुए पूछा-
‘फिर उसका कोई मैसेज आया क्या?’
काका मुस्कुराए-
‘हां--- लिखा है-....

Subscribe Now

पाखी वीडियो


दि संडे पोस्ट

पूछताछ करें