सत्तर साल के मोहन जी इस महानगर में अपने घुटनों की जांच करवाने आए थे। आए क्या थे, दरअसल लाये गए थे, कोई खाट-बिस्तर में भी नहीं थे जो उनको किसी एंबुलेंस में लाना पडा हो।
वैसे तो उनके कस्बे में ही छोटे-मोटे डॉक्टर उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर वो उनको दिखाकर इलाज भी ले लेते हैं। इस बार बेटा जब घर आया तो नहीं माना-पापा मेरे साथ चलो किसी बड़े डॉक्टर को दिखा के दवाई लिखवा ....
