जानता हूं मैं
जानता हूं मैं
कि इस शहर को
सांप सूंघ गया है
और मर चुकी हैं संवेदनाएं
धड़कते दिलों की।
जानता हूं मैं
कि कोई नहीं होगा
मुझ-सा हलाकान,
कोई नहीं देगा
मेरी बात को वजन
मेरी चीख को कान।
जानता हूं मैं
कि समझदार लोग
कतरा कर निकल जाएंगे
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