यह धरती सिर्फ मेरी नहीं है
यह धरती सिर्फ मेरी नहीं_
उस केंचुए की भी है
जो कांक्रीट की मेरी बसाहट में
चाहता है बस मुट्ठी भर मिट्टी
है उस पंछी की भी
उजड़ा है घर जिसका
बनने को दरवाजा/मेरे घर का
उन जुगनुओं की भी
जो निकलते हैं
बस रातों में
नहीं काबिले बर्दाश्त
रोशनी जिन्हें
