तुम हंसो
हंसो जैसे हरी घास पर हंसती हैं ओस की बूंदें
जैसे सुबह-सुबह खिलते हैं फूल
उतरती है मुलायम गुनगुनी धूप धरती पर
चिडिया जागने के बाद
अंगराई में फड़फड़ाती है पंख
तुम हंसो
हंसो जैसे पूजा में बजते हैं शंख
मस्जिद से आती है अजान
गली में सुन पड़ती है / दूधवाले की साइकिल की घंटी
घर के सूने बरामदे में / भोर के....
