नरेंद्र पुंडरीक

घुमक्कड़ी कविताओं का डार्क रूम

‘घुमक्कड़ औरत’µहमारे यहां यह शब्द प्रायः उन औरतों और लड़कियों के लिए प्रयुक्त होता है जो घर के बाहर बिना किसी ‘जरूरी काम’ के घूमती-फिरती दिखाई देती हैं। हमारे समाज में ‘काम’ को हमेशा किसी प्रत्यक्ष उपयोगिता या ठोस परिणाम से जोड़कर देखा गया है। जिसका कोई साफ-साफ अर्थ या लाभ समझ में आ जाए, वही काम माना जाता है।
जब राहुल सांकृत्यायन ने घुमक्कड़ शास्त्र ....

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