(‘पाखी’ पत्रिका में मेरा नियमित स्तंभ तीन वर्ष से अधिक समय से प्रकाशित हो रहा है। ‘पाखी’ मुख्यतः कथा और साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका है। इस बार मेरे स्तंभ में आप मेरी दो कहानियां पढ़ सकते हैं। इन कहानियों में जो पात्र और किरदार आए हैं, उनका किसी भी जीवित अथवा मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है।)
दो बिछड़े भाइयों की ....
