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जिनका हर कोई कायल था

जिनका हर कोई कायल था

‘पाखी’ के सितंबर अंक में ‘हंस’ और राजेंद्र यादव पर आपका संपादकीय पढ़ा। पढ़ते हुए मन में बहुत-सी बातें उठीं।
राजेंद्र जी ने आधुनिक हिंदी साहित्य के लिए जो किया, वह किसी चमत्कार से कम नहीं। नए ढंग के लेखकों को खासकर हाशिए की पृष्ठभूमि से आने वालों को खोजना और उन्हें प्रोत्साहित करना उनकी सबसे बड़ी खूबि....

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