लेकिन आप इस फुटपाथ तक पहुंचे कैसे अंकल जी। 4 दिन पहले आपसे हमारी दोस्ती हुई, उससे पहले आप कहां थे? यानी आप किधर से लुढ़ककर इधर को आए? आप हमारे टाइप दिहाड़ी मजदूर, स्मैकिए, अफीमची, भिखमंगे जैसे दिखते नहीं न, इसलिए पूछ रहा हूं।’
‘जाने दो ई सब बेकार की बात का पूछते हो तेजिंदर, एक-दो दिन में निकलेंगे दिल्ली से। हम ज्यादा दिन रहे तो यहीं मर-मरा जाएंगे। आज हो गया है सवा स....
