रेखा शाह आरबी

रेखा शाह आरबी की कविताएं

चकलाघर

औरतें चकलाघर
नहीं जाती हैं,
वह वहां रहती हैं!
पर खुशी से नहीं रहती हैं
मजबूरी में रहती है,
वहां बदकिस्मती उन्हें पहुंचाती है,

कोई औरत आज तक
अपनी खुशी से नहीं गई,
किसी को किसी के
अपनों ने छल से भेजा तो,
कोई प्रेम के हाथों
धोखा खाकर बिक पहुंचीं,
पर अपने मन से नहीं गई!

पर मर्द चकलाघर जाà....

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