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जब कविता ने आधुनिक मनुष्य की टूटन को आवाज दी

‘पाखी संवाद-जहां शब्द डरते नहीं’ यूट्यूब मंच से 26 सितंबर, 2026 को प्रसारित संवाद।

एक कवि अपने समय की सबसे बड़ी बेचैनी को शब्द देता है। उसके सामने एक ऐसी दुनिया है जो तकनीकी रूप से आगे बढ़ रही है, लेकिन भीतर से खाली होती जा रही है। शहरों में भीड़ है, मगर मनुष्य अकेला है। धर्म है, मगर विश्वास संकट में है। प्रेम है, मगर आत्मीयता टूट चुक....

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