साहित्यिक निरपेक्षता
ऐसी नहीं होनी चाहिए
कवि की राजनैतिक तटस्थता
कि वह परहेज करे
कहने से राजा पर किन्तु समूचा
रचना कर्म उसका
शब्द धर्म उसका समर्पित हो
तानाशाही दिनचर्या को
राजा किससे मिला
क्या बात हुई?
किन्तु, आप क्यों हैं नाहक चिंतित
वही कवि है निमंत्रित
आज शाम भी अकादमी के सभागार में
जिसक....
