कविता विकास

पिताजी 

किसी की नींद न खराब हो जाए 

इसलिए दबे स्वर में पिताजी कहते थे 

थोड़ा, चाय बना दे बहू।

दिन में किटी पार्टी में व्यस्त बहू से 

पलकें झुकाए पिताजी कहते 

थोड़ा, खाना निकाल दे बहू।

आराम करते वक्त विनत भाव से कहते 

थोड़ा, कम्बल ओढ़ा दे बहू।

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