‘पाखी’ का जुलाई अंक समय से मिला। विश्व के सबसे ज्यादा बिकने वाले उपन्यासों में हिंदी की दशा और दिशा पर आप की चिंता जायज है। सच कहूं तो आप की संपादकीय पूरे हिंदी साहित्य और साहित्यकारों को आईना दिखा रही है। नासिरा शर्मा का साक्षात्कार, कहानियां, कविताएं आदि सभी स्तंभ वंदनीय और संग्रहणीय लगे। बेहतरीन अंक के संपादन के लिए बधाई।
सुरेश सौरभ, ई-मेल से Subscribe Now
