दरख्त की शाखा से
एक पत्ता क्या टूटा
मायूस हो जाया करते हैं लोग
क्यों डर जाया करते हैं लोग
हवा जो उनके मन को सुहाती थी
अब बिल्कुल नहीं भाती है
क्यों घबरा जाते हैं लोग
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हिन्दी साहित्य की पत्रिकाओं की भीड़ में अलग पहचान बनाने वाली 'पाखी' का प्रकाशन सितंबर, 2008 से नियमित जारी है।