आज रविवार है। आज के दिन वह थोड़ा आराम से ही उठता है। ये वैसे भी निपट जाड़े के दिन हैं। घने कोहरे के दिन। बल्कि कभी-कभी तो दिन के पूरे बारह-दो बज जाते हैं और अपने ठीक बगल में चल रहे आदमी तक को पहचानना कठिन हुआ रहता है।
दरअसल यह तराई का इलाका है। जाडे़ के मौसम में पूरे पखवाड़े-पखवाडे़ तक कोहरा यहां का अनिवार्य हिस्सा है। जिंदगी की चाल जैसे खुदबखुद धीमी हो आती है। वैसे भी रविवार भ....
