मेरे अभिभावक, मित्र पत्रकार शेष नारायण सिंह चले गए। जबकि उनके लिए प्लाज्मा का इंतजाम भी हो गया था। हम आश्वस्त थे कि अब खतरा टल गया है, वे ठीक हो जाएंगे। अस्पताल से बाहर आकर अपने ठेठ देशी अंदाज में कहेंगे, ई ससुर, कोरोनवा हमको काहे धर लिया। हम ससुरे को पछाड़ दिए।’
इसी अंदाज में वे बातें करते थे। हमेशा परिहास के मूड में और अपने देशी अंदाज में। इतना पढ़ा लिखा इंसान हमे....
