मुहम्मद हारून रशीद खान दृराय साहबएएक ओर प्रशासनिक पद उसमें भी पुलिस अधिकारी और लेखन। आपने दोनों में सामंजस्य कैसे स्थापित किया?
विभूति नारायन राय : मैं दोहरी ज़िंदगी जीता रहा हूँ । साहित्य मे दृ या यों कहें कि लिखने और उससे ज़्यादा पढ़ने में . मेरी दिलचस्पी तो इंडियन पुलिस सर्विस का सदस्य बनने से पहले से ही थी ए मैंने सिर्फ़ इतना किया कि सेवा मे आने के बाद....
