रमा यादव

 पीढ़ियों के नाटककार 

असग़र वजाहत साहब के नाटकों पर लिखना वाकय में एक ऐसा अनुभव है जिसे नाटक की दुनिया में मंच पर जीना कहा जा सकता हैl असगर जी के नाटकों से परिचय बहुत पुराना है यह उस समय की बात है जब मै श्री राम सेंटर से दो सालाना पूर्णकालिक अभिनय का डिप्लोमा कोर्से कर रही थी बात सन २००१ के आस – पास की है l उस समय नाटक की चाल ही कुछ अलग थी या यूँ कहूँ कि अच्छे नाटक मंच पर लगातार हो रहे थे l एक दिन पता चलà¤....

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