प्रकृतस्थ होना मनुष्य होना है
फूल पत्ती
पाबंद नहीं होते किसी मालिक के
ज्यादा झिड़का तो धीरे-धीरे सूख जाएंगे
जिंदा रखना है तो इन्हें प्यार से पुष्पित करना होता है
एक हत्यारा भी यहां आकर अपने खड़ाऊं दूर रख देता है
पांव रखकर कुचलता नहीं जाता
हर रोज थोड़ा पानी, थोड़ी धूप
थोड़ी तबियत पूछनी होती है इनकी
वरना ....
