न्यू यू जर्सी से सैन फ्रांसिस्को, 6 घंटे की विमान-यात्र ने हर्षा को आ“लाद से भर दिया। उसके उत्साही पग एक सुदूर अनजान देश की परिधि लांघ चुके थे। आशा की पांखें, निस्सीम आकाश को चीरते हुए उड़ान भरने को तत्पर--- ऐसे में न चाहते हुए भी दादी की परामर्श याद आई,
‘उड़ना उतना ही चाहिए, जितना पंखों में दम हो।’
मन न जाने कहां कहां डोलने लगा। दादी की एक पक्की सहेली रहीं जो बहुत पहले ....
