महेश कुमार केशरी

महेश कुमार केशरी की कविता

भ से भय 

उनके आस-पास शोर है 
बहुत शोर इतना शोर 
की कोई आवाज उन तक पहुंच 
ही नहीं पाती---
एक लिजलिजी आवाज 
जो कराह रही है सालों से
लोग आश्चर्य से चौंक-चौंक से पड़ते हैं 
अपनी जरूरत की बातों को उनके
मुंह से सुनकर 
ग से गरीबी / ब से बेरोजगारी / भ से भूख 
फिर वो पहलू बदलते हैं 
भ से भ्रष्टाचार खत्म करेंगे 
ग से गरीबी ....

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