निकोलाइ गोगोल के लिए
जलकर राख हो गए हैं
गेहूं के खेत
तुम्हारे पूर्वजों की कब्रें
ढकी हैं बारूद और कंक्रीट से,
वे सारी स्मृतियां,
गांव के बूढ़े-बुजुर्ग, बच्चे,
भूत-प्रेत की कहानियां,
कहावतें, किस्से,
सब कुछ चीख-पुकार,
विस्थापन, बलात्कार
और धुएं में तब्दील हो गई हैं।
निकोलाइ! ....
