विक्रम सिंह

विक्रम सिंह की कविताएं

सिगरेट और समाज

एक कॉरपोरेट दफ्रतर के बाहर
चमचमाती, महंगी गाड़ियों की कतार।
उनके पास खड़ी थीं कुछ लड़कियां,
रेशमी, चमकते परिधानों में लिपटी,
हाथों में थामी हुई थीं
महंगी सिगरेट की डिब्बियां।

उनके सुर्ख लिपस्टिक लगे होंठों में
दबी हुई थी लंबी, पतली
सफेद सिगरेट।
कस लगाकर खींचतीं,
और फिर धुएं का गुबार छोड़ देतीं, Subscribe Now

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