प्रज्ञा

स्त्री-मुक्ति की बेचैन गुहारों की कहानियां

रचनाशीलता की उत्कृष्टता के प्रतिमान शाश्वत नहीं होते। समय का परिवर्तन रचनाशीलता की पहचान नई कसौटियों और नए मानकों पर करता है। इसी आधार पर कलात्मक जगत में कृति की प्रांसागिकता और 
अप्रसांगिकता भी निर्धारित होती है। ये जरूरी नहीं जो साहित्य एक समय में अपनी उत्कृष्टता पर पहुंच चुका हो वह कालांतर में भी उतना ही उत्कृष्ट रहे और यदि वह अपनी उत्कृष्टता को बनाए रखता है ....

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