अनिल सोनी

अब्बाजान

अखबार के डिजीटल संस्करण के बावजूद प्रिंट सेक्शन का नूर बरकरार था। सिमरन कौर को अपने साहित्यिक पृष्ठ की अगली पायदान पर एक प्रभावशाली कहानी चाहिए थी। वह अखबार के अंधेरे से कक्ष में स्थापित और बूढ़ी हो चुकी लाइब्रेरी से कोई क्लासिकल कहानी खोज रही थी। उस सन्नाटे में वह उपन्यासों के चीखते विषयों और बहस करती कहानियों से कितनी ही बार रू-ब-रू हो चुकी थी। अल्मारियों क....

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