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आइए, इंस्पेक्टर साहब। मुझे शुबहा था कि आप लोग मेरे घर भी जरूर आएंगे। इलाके में जितने मुसलमान हैं, उनमें से ज्यादातर के दरवाजों पर आप पहले ही दस्तक दे चुके हैं। खैर, यह भी बता दीजिए कि मेरा जुर्म क्या है? क्या कहा? आपको मुझ पर भी शक है? तो आइए और मेरे घर की तलाशी भी ले लीजिए, हालांकि मैं पहले ही बता दूं कि मैं एक गरीब दर्जी हूं। शहर में हुए बम-धमाकों से मेरा कोई लेना-देन....
